खुद को सुधारो दुनिया सुधार जाएगी




खुद को सुधारो दुनिया सुधार जाएगी



दोस्तों दुनिया मे हमने बहुत कामयाबी पाई है, जिसे हम जानते नही थे अब उसे भी जानने लगे है, सोचने की बात है हजारों साल पहले जे सब लिखा हुआ है, पौराणिक कथाओं में,
जैसे हम जानते है नहाने से तन तो साफ होता ही है मन मे भी अच्छे विचार आते है,
ओर मिटी में जो भी दबा दो एक दिन अपने अंदर समा ही लेती है।

धरती की कोख में पाप पहुचने वाली माँ गंगा ,

जैसे कि पौराणिक कथाओं में लिखा है, दुनिया के रचेता भगवान विष्णु है,

जब भगवान विष्णु ने संसार का निर्माण किया तो तब स्वर्ग, धरती और पाताल सब एक जैसे ही थे, अच्छे, बुरे ओर पुण्य आत्माओं एक ही स्थान था,

भगवान विष्णु ने फिर संसार को तीन हिसों मे बांट दिया,
जिसके कर्म जैसे वेसा उसको स्थान मिलेगा

1. स्वर्ग
2. धरती
3. पताल

स्वर्ग
स्वर्ग में देवताओं के रहने का स्थान मिला।

धरती
धरती में इंसानों को स्थान मिला।

पताल
पताल में रक्षाशों को स्थान मिला।

सभी ठीक था मगर एक समसया आ रही थी
धरती पर, धरती पर रहने वालों में से जिनका स्थान स्वर्ग में कुछ बुरे कर्मो के कारण नही मिलता उसे धरती
पर स्थान मिलता,

ओर पताल में जिसके कुछ अच्छे कर्म के कारण धरती में स्थान मिलता,

पाप और पुण्य के बीच धरती में जिनके अच्छे कर्म होते बुरे कर्म करने वालों की बुराई से उनके प्रभाव से वो भी स्वर्ग में नही जा पा रहे थे,

फिर भगवान विष्णु ने पापियों के पाप को धोने के लिये गंगा को धरती पर भेजा,
जिनका काम पापियों के पाप को धो कर धरती की कोख तक ले जाना था,

भगवान विष्णु ने गंगा और धरती को माँ का वरदान भी दिया। जिस से सारि दुनिया धरती को धरती माँ और गंगा को गंगा माँ कहती है,

जे वरदान भगवान विष्णु ने इस लिये दिया था पाप को धोने से ओर अपने अंदर बुराई को छुपाने से कभी माँ पापी नही कहलाती,

भगवान विष्णु ने जे भी कहा था जिस दिन धरती की कोख में पाप के लिये जगह नही रहेगी तब धरती का सीना चिर कर पाप आग बन कर बाहर निकलेगा ओर सभी को जला कर एक नई सभयता को जन्म देगा,
जहा सभी निशपाप होंगे मगर पाप फिर जन्म लेगा और फिरसे धरती का सीना चीर कर पाप आग बन कर निकलेगा, जे निराकार है,
जो चलता ही रहेगा,

दोस्तों पर आप जानते है,

अभी की दुनिया मे कितना पाप भरा है?

हम सिर्फ दूसरों की बात बोलते है,
दुनिया मे जे हो रहा है वो  हो रहा है,

कभी खुद की गलती नही मानते ओर ओर सोचने
वाली बात जे है, दुनिया मे रहने वाले.......
की ही बात आती है, जब कि दुनिया मे हम ही
रहते है,

हम से मतलब में, खुद की गलती जैसे कोई कामयाब
हो रहा है, हमारे मन मे जलन होने लगती है, ओर जैसे
किसी की बेहतर जिंदगी से....
जे तो एक उद्धरण है,

बोलने का मतलब जे है कि पाप ने हमें अपने अधीन कर लिया है,

दूसरों को सुधारने से पहले हमें खुद सुधारना होगा,
खुद को सुधार लिया तो दुनिया भी सुधार जाएगी,

( सुवेन्द साधु बाबा के बोल )
दोस्तों जे पोस्ट आपको कैसा लगा
आपके विचार, आपकी सोच,
मुझे जरूर कमेंट में बताएं......


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