किसान का आलसी बेटा




किसान का आलसी बेटा



एक गाँव मे राजन नाम का किसान रहता था,

वो बहुत मेहनती अऔर समझदार था,
उसे धन की भी कमी नही थी
और
उसके दो बेटे थे, बडा बेटा बहुत मेहनती  और अच्छी सोच का था।
वही छोटा बेटा, कामचोर और बहुत आलसी था।

राजन अगर छोटे बेटे को जमीन में पानी या कोई काम करने को कहता, तो उसका एक ही जवाब आता, कल कर दूंगा।

राजन के छोटे बेटे की सोच थी
हमारे पास इतनी दौलत है फिर हम खेतों में काम क्यूँ करे, मजदूरों से भी तो करवा सकते है।

और राजन को इस सोच के  चलते, अपने छोटे बेटे  की बहुत चिंता होने लगी।
राजन ने अपने बेटे को सही रास्ते पर लाने के लिये,
बहुत कोशिश की।
मगर हर कोशिश नाकाम साबित हुई,
राजन ने फिर बहुत सोच कर एक रास्ता निकाला,
गाँव के बाहर दो घर बनाया मगर दोनों घर को अधूरा ही बनाया
ओर अपने दोनों बेटों को बुलाया।
और बोला
मेरी उम्र हो गई है, अब में तीर्थ यात्रा के लिये जाना चाहता हूँ भगवान ने चाहा तो में लौट के वापस आऊंगा।
मगर जाने से पहले में अपनी सारी संपत्ति तुम दोनों को दे कर जाना चाहता हूं।
मगर याद रहे तुम दोनों में से कोई भी अपनी संपत्ति को बेच नही सकता। सारे जमीन ज़ायदाद के कागजाद में अपने साथ ले जा रहा हूँ ।

और जो गाँव के बाहर में दो घर बना रहा हूँ अब तुम अपनी मेहनत से पूरा करना, खेतों में फसल पकने वाली है उसे काट कर अपने अपने अधूरे घर को पूरा कर लेना।
जे बोल कर राजन तीर्थ यात्रा के लिये निकल गया।

अगली सुबह राजन का बड़ा बेटा अपने खेतों में फसल को देखने के इरादे से घर से निकला,
तभी मन में खयाल आया अपने छोटे भाई को भी अपने साथ ले जाता हूँ वो भी अपनी फसल को देख लेगा।
और अपने भाई के पास गया।

वो अभी सो रहा था।

बड़ा भाई बोला,
उठो भाई चलो दोनों खेतों में जाए अपने फसलों को देख लेते है। की फसल को पकने में और कितने दिन लगेगा।
छोटा भाई बोला नही भाई तुम जाओ में कल देखने जाऊंगा।
बड़ा भाई जब अपने फसलों को देख कर वापस लौट तो छोटे भाई से मिलने गया और बताया, भाई हमारी फसल तो काटने लायक हो गई है ।
कल  से फसल को काटना सुरू कर देना चाहिये,
छोटा बोला ठीक है।

अगले दिन सुबह बड़ा भाई अपने खेतों में फसल को काटने चला गया।

इधर छोटा भाई सारा दिन सोया ही रहा, जे सोच कर की कल फसल को काटने जाऊंगा।

अगले दिन भी वो सोया ही रहा, जे सोच सोच कर की कल जाऊंगा कल जाऊंगा।

ऐसा करते करते करते, उसके बड़े भाई ने अपनी सारी फसल भी उठा ली और छोटा अभी भी कल कल कर रहा था।

एक दिन उसका बड़ा भाई आया और उसे बोला भाई तेरी फसल खराब हो रही है।

छोटा भाई तभी बोला में आज ही जाने वाला था।

फिर राजन का छोटा बेटा संकर के घर गया,
संकर मजदूरी करके अपने परिवार का गुजारा करता था।

राजन का छोटे बेटे ने संकर को कहा, मेरी जमीन में जो गेहूं लगी है वो बहुत ज्यादा पक  गई है,
क्या तुम वो काट कर गेहूं मेरे घर तक पुहंचा दो गे।

संकर तैयार हो गया।

संकर ने अपने साथ के, सारे मजदूरों को लिया और खेत की तरफ चल दिया ।

एक सप्ताह के बाद संकर ओर उसके साथ जो मजदूर थे राजन के छोटे बेटे के घर पहुचे।

साथ मे गेहूं भी ले कर आये ।

राजन का छोटा बेटा गेहूँ को देख कर हका बका रह गया,
गेहूं बहुत कम थी।

उसे फिर अपने बड़े भाई की याद आ गई कि मेरा भाई तो आठ बैल गाड़ी में गेहूँ ले कर आया था और मेरा एक गाड़ी में ही कियू ।
संकर ( मजदूर ) से पूछा की इतनी कम गेहूं क्यूँ है।

संकर बोला बाबूजी गेहूँ के ज्यादा पक जाने से बहुत नुकसान हो गया और बहुत सारा गेहूँ जमीन में ही गिर गया।
और खेतो मे इतने ही गेहुँ हुए है।
फिर संकर बोला बाबू जी हमें हमारी मजदूरी दे दें।
मजदूरी के तौर पर राजन के छोटे बेटे ने गेहूँ दे दिया,
सभी मजदूरों को उनकी मजदूरी देने के बाद, राजन के छोटे बेटे के पास बस दो बोरिया गेहूँ ही बचे।

तभी राजन का बड़ा बेटा भी वहाँ पहुँच गया,
आते ही खुशी से बोला, भाई चलो चलो में तुम्हे कुछ दिखाना चाहता हूँ।

बोलता हुआ अपने छोटे भाई का हाथ पकड़ कर अपने घर ले आया,
राजन का छोटा बेटा अपने बड़े भाई का घर देख कर हैरान हो गया उसने अपने अधूरे घर को पूरा कर लिया था,
वो अपने भाई का घर देख ही रहा था कि,

तभी राजन भी वहीं पहुंच गया,
और दोनों से पूछा तुम दोनों ने कितने कितने की फसल काटी,
दोनों भाइयों ने सारी बात बताई,

फिर राजन का छोटा बेटा रोने लगा और बोला पिता जी मै समझ गया कि आप मुझे क्या समझना चाहते  थे,
मैने इस घटना से तीन बातोंं की सिख ली है

जे बोला और अगली सुबह खेतों में हल चलाने चला गया।

1.?????????
2. ????????
3. ????????



क्या आप बता सकते है,
वो तीन बातें क्या है,
जो आप इस कहानी से सीखें है comment करें।


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