अंदेखा प्यार अमीर और गरीब की कहानी जो दिल को छू ले,

अंदेखा प्यार अमीर और गरीब की कहानी जो दिल को छू ले,



दुनिया मे प्यार की कहानियां तो बहुत है, ओर ज्यादा तर सच्ची ही होती है, विश्वास करना ना करना, वो वियक्ति के सोच से जुड़ा हुए होता है ,

जो कहानी को, सुन यां किसी किताब में देख रहा है,


मगर जे कहानिया हमारी सोच को सोचने पर मजबूर कर देते है कि, प्यार हमारी जिन्दगी कैसे ओर कितना प्रभावित करता है,


में अज्ज एक गरीब और राजकुमारी की कहानी बातने जा रहा हूँ, जिसका नाम,

अंदेखा प्यार


जे कहानी एक गरीब धोबी के लड़के ओर विजय नगर की राजकुमारी की है,


राजकुमारी के पिता भीम सिंग के कड़े नियमो को सभी जानते थे, ओर उनके राज में सभी उनसे डरते थे, मगर प्रजा उतनी ही उनसे प्यार भी करती थी, भीम सिंग अपनी प्रजा के हर सुख दुख में साथ होते थे ,


भीम सिंग की एक ही संतान, राजकुमारी सुगना कुमारी थी,


भीम सिंग राजकुमारी से बहुत प्यार करते थे, ओर उनके सुरक्षा के लिये कोई भी कमी नही रखी थी,


भीम सिंग ने राजकुमारी को किसी गैर पुरुष को देखने तक पर पावंधि लगा रखी थी,


राजकुमारी के सभी कपड़े गौरख नाम का एक धोबी धोया करता था ,


गोरख जब एक दिन कपड़े धो रहा था , गोरख का पैर फिसलने से एक पत्थर पर गिर गया, ओर उसके हाथ मे चोट लग गई,


वो दर्द से बेचैन हो कर घर आ गया, ओर रामानंद से बोला,


रामानंद गोरख का पुत्र था।


बीटा आज तुम कपड़े धो कर राजमहल में दे दो,

आज मेरी ऐसी हालत नही की में कपड़े धो कर महल में दे सकूँ रामानंद अपने पिता की हालत को देखते हुये ना नही बोल सका, ओर कपड़े धोने चला गया,


रामानंद जब कपड़े धो कर घर आया उसके पिता गोरख ने पूछा, सारे कपड़े धो दिए,

रामानंद मुस्कुरा के बोला जी पिता जी सारे कपड़े धो देय,


गोरख जब सुबह उठा हाथ का दर्द अभी भी ठीक नही हुआ वो रामानंद को बोलने गया आज भी तुम कपड़े धो देना,

रामानंद पहले ही बोल पड़ा पिता जी मे कपड़े धोने जा रहा हूँ,

ओर वो बोलते ही चला गया


गोरख को बहुत अजीब लगा, जो कभी कपड़े धोने जाता ही नही था वो आज खुद ही कपड़े धोने चला गया,


गोरख की पत्नी बोली बीटा अब बड़ा हो गया है अपनी जिमेदारी उठाने लगा है,


कुछ दिन बीत जाने के बाद गोरख अब पूरी तरह से ठीक हो गया और वो भी रामानंद के साथ कपड़े धोने चला गया गोरख बोला बीटा आज से हम दोनों मिल कर काम करेंगे रामानंद कुछ नही बोला,


रामानंद ने राजकुमारी के सारे कपड़े धोने के ले लिये , गोरख देख रहा था मगर कुछ नही बोला,


बहुत दिन बीत गए,


हर रोज की तरह रामानंद अज्ज भी राजकुमारी के कपड़े धोने के बाद अपने पिता के साथ घर जा रहा था ।


गोरख ने देखा रामानंद के थैली में राजकुमारी की एक ओहड़नी पड़ी थी ,


गोरख बोला रामानंद राजकुमारी की ओहड़नी तुम्हरे थैली में किउ,

रामानंद घबराते हुए बोला पिता जी मे जे धोना बुल गया काल धो दूंगा ईसी लिये मेने थैली में रख लिया है,


रात को जब गोरख सोने जा रहा था , तब रामानंद को देखने गया कि की वो सो गया है कि नहीं,


गोरख जब रामानंद के पास गया वो उल्टे मुह लेटा हुए किसी से बातें कर रहा था ।


गोरख ने ओर करीब आ कर देखा तो रामानंद के हाथ मे राजकुमारी की ओहड़नी थी रामानंद उसी से बातें कर रहा था।


जे देख कर गोरख चोक गया और रामानंद को जोर जोर से आवाज देने लगा,


रामानंद अपने पिता को देख कर बोला किया बात है पिता जी,


गोरख बोलै। तुम किस से बात कर रहे हो,


रामानंद बोला पिता जी मे राजकुमारी से बात कर रहा हूँ, आपको पता है राजकुमारी की कपड़े मुझसे बातें करते है, ओर उसने बताया राजमहल में वो किसी कैदी की तरह ज़िन्दगी गुजर रही है।


गोरख मन ही मन सोच रहा था कि मेरा बेटा पागल हो गया है,

मगर गोरख को जे चिन्ता सताय जा रही थी इस बात का अगर महाराज को पता चलेगा तो वो मोत की सजा ना सुना दें,


जे सोचते सोचते गोरख ने सारी रात जाग कर ही गुजार दी, सुबह वो वैद्य के पास गया।


वैद्य को सारी बात बताई, वैद्य रामानंद के पास गया ओर बहुत अच्छे से परीक्षण के बाद, गोरख को बताया रामानंद को ना कोई बीमारी और ना वो पागल है,

बस वो राजकुमारी को अपने पास महसूस करता है

जिसे हम प्रेम (प्यार) कहते है।

वैद्य ने कहा इसका में कोई इलाज नही कर सकता लेकिन एक उपाय है, अगर राजकुमारी की हर वस्तु को रामानंद से दूर किया जाय तो वो पहले जैसा हो सकता है।


गोरख ने रामानंद के मन से राजकुमारी को निकालने की बहुत कोशिश की मगर हर कोशिश नाकाम रही,


आखिर गोरख के दोस्त ने एक तरकीब निकली,


जब रामानंद कपड़े लेने राजमहल के राज दरवार के पास गया राजदरवारी ने रामानंद को कपड़े दिए मगर उन कपड़ों में राजकुमारी के कपड़े नही थे।


रामानंद ने पूछा राजकुमारी के कपड़े नही दिए दरवारी ने जबाब दिया आज राजकुमारी के कपड़े नही आए,


रामानंद ने उदासी से कपड़े को उठाया ओर धोबी घाट चला गया,


थोड़ी देर बाद गोरख आया और रामानंद को बताया कि राजकुमारी का स्वर्ग वास् हो गया है।


रामानंद बात सुनते ही धरती में गिर गया,

रामानंद को गिरा देख लोगो की भीड़ लग गई,

तभी वैद्य भी आगया।

देखने के बाद वैद्य ने बताया रामानंद मर गया है।


कुछ दिन बाद जब गोरख कपड़े लेने राजदरवारी के पास गया। राजदरवारी ने गोरख से माफी मांगने लगा,

किउंकि राजकुमारी के मारने वाली बात बता कर राजकुमारी को रामानंद के मन से निकलना चाहता था, जे बुद्धि राजदरवारी ने ही दिया था,


राजदरवारी ने बताया एक बुरी खबर है, राजकुमारी ने कहा है उनके कपड़े पहले जैसे साफ नही होते।

इस लिये दूसरे धोबी को कपड़े धोने दे दिया।


लेकिन जितने भी धोबी राजकुमारी के कपड़े धो धो कर ले आते राजकुमारी को पसंद ही नही होता , चाहे वो कितनी भी अछि से धुले हो, जे समसया भी एक बड़ी हो चुकी थी राजकुमारी के कपड़े सही से धूल नही रहे,

राज के सभी धोबी कपड़ों को धो धो कर देखय गे लेकिन राजकुमारी को पसंद नही आया

जब जे बात माहा राज भीम सिंग को पता चली वो उनोने राजदरवारी को बुलाया और पूछा राजकुमारी के कपड़े पहले कौन धोता था,

राजदरवारी ने रामानंद की सारी बात बताई राजकुमारी भी सभी बातों को सुन रही थी,

आंखों में आंसू लिये भीम सिंग को बोली पिता जी पहले के धुले कपड़ों में पहनती थी मुझे ऐसा लगता था कोई मुझसे बातें कर रहा है, ओर कोई मेरे पास है,

मेरे अपने होने का अहसास था, जो अभी नही होता में अभी समझी वो उनका प्यार था,


इतनी बात बोल कर राजकुमारी गिर गई, भीम सिंग ने राजवैद्य को बुलाया वैद्य ने बताया राजकुमारी अब इस दुनिया मे नही रही,

शिक्षा



अगर आपका प्यार सच है, जिसे आप प्यार करते हो, वो आपके प्यार को जरूर महसूस करता होगा,



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